कोई गहरा दोस्त बहुत दूर चला गया था -तरक्की कि मंज़िल पर और हम खुश थे कि वो जीत रहा है / सोचा था फासले कभी दिलो मे दुरिया नही पैदा करते पर क्या पता था कि हम गलत है / सोचा था जब वो लौटेगा तो उसके सारे सुख दुःख बाटेंगे, आप बीती पूछेंगे, सालो के फासले पलो मे मिटा लेंगे -पर जब मिले तो दोस्त मिला भी तो अजनबियों कि तरह / नही, कोई अजनबी ही मिला / ना अपनापन था, ना प्यार , ना दोस्ती का कोई नामोनिशान बाकी था ,यादे ही बाक़ी थी वो भी शायद मेरे ही पास/ ना आसू दिखा सके ना छुपा सके / दिखाते उन्हें जिन्हे उनकी फिक्र होती या कहिये कद्र होती/ बेमोल आँसूओ को यहा पूछता कौन है / दिल कि रंजिश का कोई ठिकाना ना था , इस तरह तो वो हम से बेगाना ना था / किस से शिकवा करते - वक़्त से ,उस से या अपने आप से / खुद को समझा ने मे ही समझदारी थी/ वक़्त मुझ पे भी मेहरबान रहा - अब वो रंजिश ना रही, हां, एक हलकी सी कसक
बाक़ी है कही / शायद वक़्त उसपे भी अपना मरहम लगा दे /
कोई गिला नही मेरे दोस्त तुझ से -तेरी भी खता नही / मौसमों के बदलने पर कोई नाराज क्यो हो भला // सबक तो और एक मिला जिंदगी का - सब से बड़ा सुख और सब से बड़ा दर्द कोई सब से ज्यादा अपना ही दे सकता है हमे / अच्छा है मेरे दोस्त- तुने मुझे दर्द कि गहराई दी , जो शायद हजार सुख मिलके भी ना दे पाते /
तुम से गिला तब भी ना था , अब भी नही, और दुवाए यादो के साथ पलती है/ तुझ से ना दोस्ती है ना बैर है, क्या पता हम कौन है - अपने है या ग़ैर है // तुम्हारे पास हो 'ग़र इन सवालो का जवाब मुझ तक जरूर पहुचा देना, मेरे दिल कि आवाज़ अब तुझ तक पहुचती नही //
Wednesday, June 13, 2007
कोई दोस्त बिछड़ गया //
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4 comments:
चिन्ता न कीजये, हिन्दी चिट्ठाकारी में बहुत से अजनबी मिलेंगे जो मित्र से बढ़ कर होंगे।
If you can give me your mail-id, I think I can explain things.
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