Friday, November 30, 2007

बस यही सिखा है /

लोग और दुनिया मेरी समझ के परे है / ऐसा नही कि मेरे हिस्से मे जीवन के सभी अनुभव है , पर जितने कुछ है उनसे लोगो के बारे मे इतना बहोत बार देखा कि लोग बहोत जल्दी सब कुछ भूल जाते है/
आप का प्यार ,आप का विश्वास, दोस्ती , और सहानुभूती कि लोगो को कोई परवाह नही होती/ बहोत बार लोग आप का सिर्फ इस्तेमाल करते है और जरूरत खत्म होने पर आप को भूल जाते है /बड़ी अजीब सच्चाई है जिंदगी कि , आप कि अच्छाई का लोग बस इस्तेमाल करते है /
आप जिन्हें अपने जीवन का हिस्सा मानते हो, अनमिट कहानी मानते हो , उन्हें आप को अपने आप से अलग करने मे एक पल भी नही लगता ,नही तकलीफ होती है / आज तक समझ नही पाई, नही कभी समझ पावूंगी कि लोग पत्थर कैसे बनते है !!!!! चलो, जीने का एक तरीका ही समझ कर ऐसे अनुभवों को अपने साथ लिए चल रही हूँ, जीवन कि पूंजी मे हर अनुभव कि कीमत है !!!!!!! यह नही के इन्सानीयत पर विश्वास नही, भरोसा नही, नही-गहरा विश्वास है, हर बुराई मुझे अपने आप को और अच्छा बनाने कि प्रेरणा देती है, चाहे लोग आप को भुला दे पर आप का जमीर आप कि नेकी को नही भूलता , आप खुद साथ तो सच्चे है, जीवन का बस यही हासिल -नेकी कर कुवे मे डाल/ रिश्तों से हार झेलनी पड़ती है पर मेरी खुदी तो जीतती है, बस जीने के लिए अपनी नेकी का सहारा काफी है///